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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
फिर उसी रहगुज़र पर शायद ...
वाजपेयी की कविता ऊँचाई
Aag jalti rahe ..